जिस पर यहां स्पष्ट किया जा रहा है कि पूज्य महाराजश्री प्रशान्त जी कथा कहने का कोई पैसा (धन) नहीं लेते हैं ।
अब प्रश्न आता है कि पंडित प्रशान्त जी महाराज कथा कहने का कोई धन नहीं लेते हैं तो उनकी व्यक्तिगत व्यवस्थाएं कैसे चलती हैं ?
इस प्रश्न के जवाब में स्पष्ट किया जा रहा है कि महाराज जी की कथा में भक्तों के द्वारा स्वेक्षा व स्वतंत्र रूप से जो कुछ भेंट किया जाता है उसी से सारी व्यवस्थाएं पूरी होती हैं ।
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